महाशिवरात्रि के पर्व पर उज्जैन के महाकाल मंदिर में भारी भीड।

 

अकाल मृत्यू वो मरे जो काम करे चंडाल का, काल उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का…

Mahakaleshwar Jyotirlinga temple महाशिवरात्रि के पर्व पर उज्जैन के महाकाल मंदिर में भारी भीड।
photo: wikimapia

आज महाशिवरात्रि के मौके पर पूरा प्रदेश शिव की भक्ति में लीन है। उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि के मौके पर पूजा अर्चना की गई। सुबह-सुबह बाबा भोलेनाथ की भस्म आरती की गई। महाशिवरात्रि के मौके पर महाकाल मंदिर को फूलों से सजाया गया। महाकाल मंदिर को फूलों से सजाया गया है। सुबह से भारी संख्या में श्रद्धालु महाकाल मंदिर पहुंच रहे हैं।

 

मंदिर प्रांगण में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। महाशिवरात्रि पर्व को ऐतिहासिक बनाने के लिए उज्जैन में दीपों से बाबा महाकाल की नगरी को रोशन किया जाएगा। महाशिवरात्रि के पर्व पर मध्य प्रदेश के उज्जैन नगरी में स्थित शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से 1 ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।


आपको इस महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़े कुछ कहानियों के बारे में बताते हैं| शिव महापुराण के मुताबिक ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर यहां स्वयं प्रकट हुआ है। यहां भगवान महाकाल विराजमान है। महाकाल मंदिर छठवीं शताब्दी में निर्मित 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक बताया जाता है और यह रुद्रसागर के समीप है ऐसा भी बताया जाता है।

 
Mahakal Photo
Photo: Bing
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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे प्रकट हुआ इसके पीछे पौराणिक कथा है। कहा जाता है कि अवंतिका याने की पुरानी उज्जैन नगरी भगवान शिव को बहुत प्रिय थी। यहां भोलेनाथ के कई भक्त रहते थे। यहां पर रत्नमाल पर्वत पर एक दूषण नाम का राक्षस रहता था। उसे ब्रह्मा जी का वरदान प्राप्त था। इसी घमंड में चूर होकार अवंतिका नगर के लोगों को परेशान करता था।

उसके अधार्मिक कृत्यों से परेशान होकर अवंतिका नगर के लोगों ने भोलेनाथ की प्रार्थना की। लोगों की पूजा अर्चना से प्रसन्न होकर भगवान शिव धरती फाड़ कर महाकाल के रूप में प्रकट हुए और उन्होंने उस राक्षस का वध कर दिया और नगर की रक्षा की। इसके बाद वहां के लोगों ने भगवान शिव को वही रुकने का निवेदन किया। लोगों के आग्रह से अभिभूत होकर भगवान शिव वही विराजमान हो गये।

 
 

इसी वजह से इस जगह का नाम महाकालेश्वर पड गया। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से ये जाना जाता है। भगवान शिव का यह मंदिर अति प्राचीन माना जाता है। शिव पुराण के मुताबिक इस मंदिर की स्थापना द्वापर युग में हुई थी|

इस मंदिर के विशेष बात यह है कि यहां भगवान शिव महाकाल के रूप में दक्षिण मुखी होकर विराजमान है। मंदिर के ठीक ऊपर से कर्क रेखा गुजरती है। इसलिए इसे पृथ्वी का नाभि स्थल भी कहा जाता है। हर साल लाखों की संख्या में लोग देश-विदेश से बाबा महाकाल का दर्शन करने आते है। बाबा महाकाल के दर्शन मन प्रसन्न हो जाता है।

 

बाबा महाकाल की नगरी में महाशिवरात्रि की तैयारियां जोरों पर है। महाशिवरात्रि पर बाबा महाकाल की नगरी को दीपो से रौशन किया जाएगा। जिसके लिए प्रशासन की तरफ से कार्य योजना का पूरा प्लान तैयार है। आपको बता दें कि महाशिवरात्रि पर्व पर उज्जैन में लाखों की संख्या में भक्त आने का अनुमान है। जिसके लिये ट्राफिक जाम की समस्या से बचने के लिए श्रद्धालुओं को निर्धारित मार्ग से जाना होगा। वही व्हीआयपी और व्हिव्हीआयपी लोगों के लिये अलग से मार्ग निर्धारित किये गये है।

 
 

पुरे देश में महाशिवरात्रि का उत्सव बडे धूम धाम से मनाया जा रहा है। आप सभी को महाशिवरात्रि की ढेर सारी शुभकामनाएं।

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